जयकिशन की बरसी पर विशेष: कल क्या हो, किसने जाना

-दिनेश ठाकुरचालीस के दशक के आखिर में, जब भारतीय सिनेमा पारसी थिएटर के प्रभाव से आजाद होकर अपनी अलग जमीन तैयार कर रहा था, राज कपूर की ‘बरसात’ (1949) सिनेमाघरों में पहुंची और इसके संगीत ने जमाने को झुमा दिया। थोड़ा सुगम-शास्त्रीय, थोड़ा लोकगीत और थोड़ा पश्चिमी शैली का यह …

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